निर्दोष साधुओं की भीड़ द्वारा हत्या
महाराष्ट्र के पालघर की हृदयविरादक घटना से आज पूरा देश दुःखी है ब्यक्तिगत रूप से हत्या का वीडियो देखकर मुझे अति ग्लानि और पीड़ा हुई ,किसी उन्मादी भीड़ के हाथों उन निर्दोष लोगों को चोर बताकर लाठी डंडे से पीटना और पुलिस की मौजूदगी में उनका नरसंहार करना यह मानवतावादी ब्यवस्था के खिलाफ होने के साथ साथ भगवा राष्ट्र के सोच के साथ राजनीति करने वाली हिन्दू हितों की बात करने वाली सत्तासीन महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार और उनके मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की इस घटना के प्रति उदासीनता देश मे मिशनरी ब्यस्था को मजबूत करने जैसा है ।आज शिवसेना जैसी पार्टी का चुप होना संजय राऊत का बयान न आना यह समझ के परे है इन दो दिनों से वामपंथी मित्रो के लेख पढ़ा इस घटना पर निंदा के अतिरिक्त कोई बात उनके द्वारा नही लिखा गया ,चूँकि वामपंथी मित्रो की बीमारी कोरोना से भी खतरनाक है वे धर्म और जाति के चक्रब्युह में फसे लोग है उनके लेख मुसलमान की पीड़ा से ऊपर उठ नही सकते शायद यह साधु संत मुसलमान होते फिर अरुंधति रॉय से लेकर स्वरा भास्कर और सीताराम येचुरी से कन्हैया कुमार तक संविधान के पन्नो के साथ उध्दव सरकार को पानी पी पी कर गाली देते और न जाने कितने धरने और प्रदर्शन चालू होते ।चूँकि महाराष्ट्र में धृतराष्ट्र का शासन है जिसने पुत्र को मंत्री बनाने लिए सिद्धान्त से समझौता कर लिया ,वहाँ के मुख्यमंत्री दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री को सामना जैसी पत्रिका के माध्यम से नीति और नियम का ज्ञान देते है परंतु इस घटनाक्रम पर सामना जैसी पत्रिका में सन्नाटा होना यह भारत की गिरती हुई राजनीतिक ब्यवस्था का परिचायक है ।मैं नही जानता की वह भीड़ किस धर्म और जाति की थी पर जिस क्रूरता से हत्या किया गया निश्चित रूप से यह उस समाज के लोग नही हो सकते जिनकी आस्था राम और कृष्ण में रहती है।देश के कई हिस्सों में गाय के नाम पर भी हत्याएं हुई है जिसमे राजस्थान के पहलू खान की ह्त्या पर लिंचिंग जैसे शब्द को मैंने सुना था ,उस समय देश मे जिस प्रकार के वातावरण को विपक्ष ने तैयार किया शायद महाराष्ट्र की वर्तमान घटना पर देश का प्रमुख विपक्ष कुछ बोलता पर महाराष्ट्र में तो राहुल गांधी जी आप की भी सरकार साथ में है इस बार अपने मुख्यमंत्री को थोड़ा सा कर्तब्य बोध कराए या नरेंद्र मोदी जी को ही इस घटना का जिम्मेदार बता दीजिये । राहुल जी काश आप इंदिरा जी को पढ़ते उनका देश के साधु संतों के प्रति क्या आदर रहा है । बाबा राघव दास से लेकर देवरहवा बाबा तक् का वे हमेशा आशीर्वाद लेने जाती थी और जमीनी सच्चाई से रूबरू होती थी लेकिन आप लोग तो वर्तमान में दिल्ली के रामलीला कांड वाले लोग के सोच के साथ है फिर भारत के किस राजनीतिक दल से हम कौन सा उम्मीद करे ।
हालांकि मैं देखता हूं भारत का आम हिन्दू समाज भी ट्रेन में कोई साधु संत सीट पर बैठा है तो लोग उसे उठाने लगते है उस पर व्यंग और आलोचना करते है और कोई साधु संत भुलवश रात में निकल जाए तो उसे चोर बताकर पीटने लगते है कुछ जगह मठिया मंदिर की जमीन के लिए रात में साधुओं की हत्याएं आये दिन होती है यह मनोवृति देश के लिए ठीक नही ।साधु संत हिन्दू समाज के पथ प्रदर्शक है हो सकता है कुछ साधु संत बुरे हो पर इसका मतलब यह नही कि आप उन्हें सजा दे उनके लिए भी कानून और सजा का प्रावधान है और साधु संतों के अपने भी नियम और कानून है जहाँ उनका सम्प्रदाय उन्हें दोषी पाए जाने पर दंडित करता है ।इसलिये इन निर्दोष लोगों की हत्या के जिम्मेदार जो भी हो उन्हें वहा की उद्धव सरकार न्याययोचित करवाई करे और कठोर दंड देकर इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाए वरना हिंदू हृदय सम्राट बाला साहब की आत्मा को बहुत कष्ट होगा ।आज पूरे देश के साधु संतों में जो असंतोष ब्याप्त है इस घटना के पश्चात हो सकता है कि कही यह उग्र रूप न धारण करे क्यो कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और जूना अखाड़े ने जिस प्रकार का बयान दिया है इसे हल्के में लेने की कोशिस किसी बड़े घटना को दावत देने जैसा है इसलिये केंद्र की सरकार भी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने के लिए जो भी नियमुसार हो सके उस दिशा में पहल करे ,वह संख्या चाहे कितनी भी हो सबको उम्र कैद या फाँसी दीजिये वरना श्री रामचरित्रमानस में गोस्वामी जी ने लिखा है -
विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ।।"
मेरे ब्लॉग से - मनोज
अंत मे इन महान साधु द्वय की मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। ॐ शांति शांति शांति ।
हालांकि मैं देखता हूं भारत का आम हिन्दू समाज भी ट्रेन में कोई साधु संत सीट पर बैठा है तो लोग उसे उठाने लगते है उस पर व्यंग और आलोचना करते है और कोई साधु संत भुलवश रात में निकल जाए तो उसे चोर बताकर पीटने लगते है कुछ जगह मठिया मंदिर की जमीन के लिए रात में साधुओं की हत्याएं आये दिन होती है यह मनोवृति देश के लिए ठीक नही ।साधु संत हिन्दू समाज के पथ प्रदर्शक है हो सकता है कुछ साधु संत बुरे हो पर इसका मतलब यह नही कि आप उन्हें सजा दे उनके लिए भी कानून और सजा का प्रावधान है और साधु संतों के अपने भी नियम और कानून है जहाँ उनका सम्प्रदाय उन्हें दोषी पाए जाने पर दंडित करता है ।इसलिये इन निर्दोष लोगों की हत्या के जिम्मेदार जो भी हो उन्हें वहा की उद्धव सरकार न्याययोचित करवाई करे और कठोर दंड देकर इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाए वरना हिंदू हृदय सम्राट बाला साहब की आत्मा को बहुत कष्ट होगा ।आज पूरे देश के साधु संतों में जो असंतोष ब्याप्त है इस घटना के पश्चात हो सकता है कि कही यह उग्र रूप न धारण करे क्यो कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और जूना अखाड़े ने जिस प्रकार का बयान दिया है इसे हल्के में लेने की कोशिस किसी बड़े घटना को दावत देने जैसा है इसलिये केंद्र की सरकार भी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने के लिए जो भी नियमुसार हो सके उस दिशा में पहल करे ,वह संख्या चाहे कितनी भी हो सबको उम्र कैद या फाँसी दीजिये वरना श्री रामचरित्रमानस में गोस्वामी जी ने लिखा है -
विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ।।"
मेरे ब्लॉग से - मनोज
अंत मे इन महान साधु द्वय की मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। ॐ शांति शांति शांति ।
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