वर्चुअल राजनीति बनाम कोरोना संकट

वर्चुअल राजनीति बनाम कोरोना संक्रमण

अभी कुछ दिन पहले देश के  गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी द्वारा बिहार में वर्चुअल रैली का आयोजन किया गया।पहले तो हम वर्चुअल का मतलब समझने की कोशिश  करे तो इसे आभासी कहते है और जब इसमे रैली शब्द जुड़ गया तो सूचना प्राद्योगिकी विज्ञान के इस अनूठे प्रयोग में भी राजनीतिक महक आना स्वाभाविक है ।कुल मिलाकर इस रैली में मंच भी था नेता जी भी थे कुछ सपोर्टिंग लोग थे पर जोर जोर से जिंदाबाद कहने वाले लोग अपने घर टीवी मोबाइल कंप्यूटर टैबलेट के माध्यम से अपने नेता को सुनते हुए नजर आए ,इसके लिए दो जगह पंडाल बने थे एक पटना जहाँ बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी मौजूद थे तो दूसरा देश की राजधानी दिल्ली जहाँ पार्टी के कद्दावर नेता अमित शाह ने अपनी वर्चुअल रैली के माध्यम से  अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और बिहार सहित  देश को संबोधित किया  ।मंच से संचालन भी हुवा और कार्यक्रम में डिजिटल भारत अभियान की सफलता का लिटमस टेस्ट भी हुवा  पर अगर हम इस रैली के ब्यापकता पर प्रकाश डाले तो कुल मिलाकर  इसे हम भारतीय जनता पार्टी द्वारा बिहार चुनाव 2020 की तैयारियों के शंखनाद के रूप में देख सकते है। जहाँ भारतीय जनता पार्टी द्वारा ब्यापक पैमाने पर पैसे खर्च करने और कोरोना संक्रमण काल मे राजनीति करने का आरोप बिहार के नेता विरोधी दल  तेजस्वी यादव ने लगाया जो कुछ हद तक सही भी दिखता है , पर वैसे  तो हर पार्टी को  अपनी तैयारी करने का पूरा हक है और सभी राजनीतिक दल वर्चुअल या नान वर्चुअल अपने अपने रणनीति के हिसाब से कार्य कर रहे है पर  बिहार विपक्ष राजद से लेकर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने वर्चुअल रैली तो नही किया लेकिन अपने अपने प्रकार से राजनीतिक् गर्मी और  अपने जनाधार को बढ़ाने में दिन रात लगे रहे है।सबसे पहले बिहार के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार को दो हजार प्राइवेट बसों को प्रवासी मजदूरों को लाने हेतु  देने की घोषणा किया क्या यह राजनीति की श्रेणी में नही आता दूसरा  गोपालगंज हत्याकांड के नाम पर सैकड़ो विधायक और कार्यकर्ताओं के साथ गोपालगंज जाने पर अड़े रहना और सोशल डिस्टेन्स की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए कोरोना जैसी बीमारी में अपने सहित लोगो की जान को जोखिम में डालना इसे भी हम सही नही कह सकते । उसके बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की नेता  प्रियंका गांधी ने एक हजार बस देने की पेशकश किया जिस पर एक लंबा ड्रामा उत्तर प्रदेश में चला ,और अंततः लंबी चौड़ी राजनीति के बाद बसे वापस हुई लाखो रुपये की किराए की बसे वापस राजस्थान लौट गई और हप्ते तक चलने वाली खिंचतान  के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की  गिरफ्तारी हुई  और आंदोलन की  रफ्तार धीमा हुवा ।यहा भी सोसल डिस्टेंस के साथ एक प्रश्न बना की जो राजस्थान अपने यहा लोगो को पैदल चलने पर विवश किया वह उतर प्रदेश सरकार को अपनी राज्य की बसे किस लिए देना चाहता था कही न कही यह सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट था  या राजस्थान में कई दिनों पहले सब सामान्य हो गया ।हालांकि इस लेख में सबसे मजेदार दिल्ली के मुख्यमंत्री को मैं मानता हूं उनके पास एक तो मोहल्ला क्लीनिक है जहाँ कोरोना छोड़कर हर रोग का इलाज है यहाँ तक कि डॉक्टर भी संक्रमित होकर घर बैठे होम क्वारन्टीन है   दूसरा उनके पास अपने कर्मचारियों को देने के पैसे नही है क्यो कि सब माफ है  और तीसरा उनका देश के हर टेलीविजन चैनल पर प्रचार आज भी अनवरत चल रहा है  जहाँ दिल्ली सबसे बेहतर प्रदेश के साथ आगे बढ़ रहा है  दिल्ली में  सब फ्री है और  अरविंद केजरीवाल का मुस्कुराता फ़ोटो  देश के राष्ट्रीय चैनलों पर लाखों रुपये खर्च कर  इस महामारी के संकट में सिर्फ यही बताने आता है। वे दिल्ली के बाहर के लोगों का दिल्ली में इलाज के खिलाफ है क्यो की अब्यवस्था फैल रही है । शायद अब दिल्ली में देश के बाहर के निवासियों को बीजा और पासपोर्ट की मांग केजरीवाल जी कर दे तो इसमे आश्चर्य नही होना चाहिए जब कोरोना का रौद्र रूप देश मे महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में सबसे ज्यादा है मरीजों के शव हॉस्पिटल के कचरे में मिल रहे हो  जहाँ जमातियों को कोरोना फैलाने की खुली छूट दी गयी हो उनको इस टी वी प्रचार की आवश्यकता क्यो महसूस हो रही है ये तो वही जाने पर इस विपत्ति काल मे केजरीवाल को कैसे क्लीन चिट कैसे दिया जाए ।
अब इस लेख के महत्वपूर्ण पक्ष पर आते है जहाँ मुझसे अमित शाह के वर्चुअल रैली पर मेरे विचार को समझने का प्रयास किया गया पर मैं भी मानता हूं और  ब्यक्तिगत रूप से  आज के  वर्तमान राजनीतिक सरगर्मी से दुखी हूं ।आज के  हालात को देखकर आप की  रैली वर्चुअल हो या एक्चुअल किसी कीमत पर नही होनी चाहिए पर आश्चर्यजनक यह है कि जिन लोगो को राजनीतिक गलत फैसले रोकने की जिम्मेदारी है आज का विपक्ष स्वयं छद्म राजनीति के आकंठ में डूबा है आज  विपक्ष को  इस तरह के रैली को पूर्णतः  रोकने के बयान के बजाय इस वर्चुअल रैली के खर्च को बता कर अपनी भूमिका समाप्त कर लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है ।पूरे देश में विपक्ष के किसी राजनीतिक दल ने देश मे आगामी होने वाले मुख्य चुनाव या उप चुनाव को स्थगित करने का सुझाव तक सरकार या राष्ट्रपति महोदय को नही दिया इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।यहा तक कि महाराष्ट्र में संवैधनिक संकट के नाम पर विधान परिषद के चुनाव हुए यह अलग बात है कि जीत निर्विरोध हुई । आज जब एकतरफ देश और प्रदेशों के मुख्यमंत्री आमजन से पीएम, सीएम केयर फंड में दान की अपील कर रहे है ,देश के लाखों कर्मचारियों के डीए रोके गए  वेतन काटे गए प्राइवेट सेक्टर में नौकरी छूट गयी हो  किसान ब्यापार और मजदूर  बुरे हाल में हो वहा इस तरह देश के पैसे को चुनाव के नाम पर पानी मे बहाने  के निर्णय की मैं कड़े शब्दो में निंदा करता हूं । वह चाहे भारतीय जनता पार्टी अमित शाह हो या प्रचार मास्टर आप नेता अरविंद केजरीवाल सहित पूरा विपक्ष ही क्यो न हो । लेकिन जब देश मे समय पर चुनाव होंगे लोकतंत्र की दुहाई दी जाएगी तो फिर वह राजनीति वर्चुअल और एक्चुवल होगी उसे फिर गलत कहना भी मैं समझता हूं सही नही होगा ।पर आज  जरूरत सिर्फ और सिर्फ कोरोना के उपचार और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का समय है ।एक तरफ जहां देश मे  कोरोना जांच की पर्याप्त ब्यवस्था नही है हजारों लोग उपचार के अभाव में इलाज के लिए तड़प रहे है यहाँ तक कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त ब्यवस्था नही है  तो इस प्रकार की  कठिन स्थिति  यह हमारे लोकतंत्र पर करारा तमाचा है। लोगो के पास मास्क सेनिटाइजर औऱ सोसल डिस्टेंस पर रहने के लिए कमरे नही है और एक नई समस्या कोरोना संक्रमण के कारण  लाखो लोगो की सर्जरी और प्राथमिक उपचार रुके पड़े है ऐसा में देश मे सिर्फ लोकतंत्र के नाम पर रैली और राजनीति करना यह किसी भी दल को शोभा नही देता। मेरा तो ब्यक्तिगत मानना है कि सभी दलों के आधिकारिक बैंक एकाउंट से 50% तक पैसा जब्त कर कोरोना और अन्य वैश्विक महामारियों के लिए वृहद आइसोलेशन सेंटर बनाये जाए क्यो की इन राजनीतिक पार्टियों के पास किराए की बस टीवी पर अपनी पार्टी का प्रचार घूमने के लिए मंहगी गाड़ी  पहनने के लिए महंगे कपडे और  वर्चुअल ब्यवस्था कर रैली  के लिए पैसा है तो यह पैसा एक वर्ष तक  चुनाव रोककर देश के आम नागरिक के स्वास्थ्य ब्यवस्था  पर सीधे खर्च होने चाहिए ।जब देश मे लोग ही नही रहेंगे तो फिर यह संविधान और संवैधानिक संकट का रोना रोकर देश को चुनाव में झोंकना और गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने वाले  राजनेता अपना शासन किस मनुष्य पर चलाएंगे।देश की सभी पार्टियों से निवेदन है कि अभी भारत को बचाइए देश मे चुनाव बहुत जरूरी चीज नही है कुछ दिनों राज्यपाल के शासन में भी  हम सब काम कर सकते है।देश के  राजनीतिक पार्टियों और खासतौर से देश के सत्ताधारी दल से हम विशेष रूप से निवेदन करेंगे कि अभी वर्तमान समय गरीब लोगो की कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में  सेवा किया जाए यही एक्चुअल राजनीति है और भविष्य में वर्चुअल रैली को सफल बनाने का रास्ता है ।

मेरे प्रिय मित्र और देश के बड़े पत्रकार द्वय श्री रजनीश मिश्र और श्री नरेंद्र मिश्र जी को सादर समर्पित ।
                              मनोज
                       (स्वतंत्र विचारक)
                        8953040684

Comments

Popular posts from this blog

चिरंजीवी भगवान परशुराम

माता शबरी जिन्होंने पशु हिंसा विरोध में घर का त्याग किया

प्लासी से सीखों